Sunday, June 2, 2013

Margidhwa the Dog story

मर्गिध्वा

मेरे घर के पीछे बुधई बाबा का घर था उनका एक लड़का जिसका नाम पुल्लू था एक बार कही जा रहा था तो एक छोटे से कुत्ते का बच्चा मिला जो सो रहा था और जैसे बहुत भीगा भीगा सा लग रहा था पुल्लू ने उसे देखा तो दया आ गई और उसे उठा के देखने लगा पर वो उठ ही नहीं रहा था जैसे लगा रहा था की मर गया है ।

पुल्लू ने सोचा की चलो इसे जमीन में गाड देता हूँ । उसने गड्ढा खोद कर उसमे उस बच्चे को रख दिया पर जैसे ही मिटटी डाला वो पौन करके बोला देखा तो वो जिन्दा था तो पुल्लू उसे घर ले आया और क्योंकि वो मरने से बचा था इसलिए इसका नाम मर्गिध्वा रख दिया ।

दिन बीतते गए अब मर्गिध्वा बड़ा हो रहा था तो उसकी सैतानी बढती जा रही थी कभी मेरे घर की रोटी चोरी कर लेता तो कभी किसी और की एक बार तो हद ही हो गई मेरे घर का एक नौकर था उसकी खाने के साथ आदत थी की हर बार रोटी मुह में डालने का बाद मुह को ऊपर की ऒर करके खाना खाता था ।

मर्गिध्वा सामने ही बैठा था बहुत देर हो गई जब मर्गिध्वा ने देखा की खाना उसे नहीं मिलने वाला तो बाबु ने जैसे ही मुह ऊपर किया मर्गिध्वा उनकी थाली में ही खाने लगा जब बाबु ने देखा तो पूरा खान गायब हो चूका था बाबु को गुस्सा आ गया तो लाठी उठाकर उसे मारने लगा मगर ये क्या लाठी ही टूट गई पर मर्गिध्वा की पीठ इतनी मजबूत जैसे सारी मार सह गया और उसे कुछ हुआ ही न हो ।

एक बार सावन के महीने में वो एक कुतिया के पीछे पीछे घूम रहा था तो देखा की सामने से एक बड़ा सा कुत्ता आ गया मर्गिध्वा उससे लड़ गया बहुत देर तक लड़ाई चलती रही अंत में बड़ा कुत्ता हार कर भाग गया मर्गिध्वा भी थक गया था अब उसमे कुतिया का साथ देने की ताकत न थी वो घर वापस आ गया मगर ये क्या मर्गिध्वा का आधा कान तो गायब था ।

जब भी कोई खाना खाता वो सामने बैठ जाता था एक बार मेरी दीदी खाना खा रही थी तो वो सामने बैठ गया वो बहुत गन्दा होकर आया था दीदी को गुस्सा आ गया उसे उठा के घर की छत से नीचे फेक दिया पर वो मर नहीं और फिर आकर सामने बैठ गया दीदी ने उसकी अच्छी किस्मत समझकर फिर नहीं फेका ।

में खाली समय में मर्गिध्वा के साथ खेलता था मर्गिध्वा पूरे १० साल तक जिन्दा रहा आज वो हमारे बीच नहीं है पर उसकी बहुत सारी खट्टी मीठी यादें आज भी जिन्दा है ।

Sunday, May 12, 2013

How to detect fake nakali or jaali note of Rs 1000 and 500

नकली नोट का बहिष्कार करें

आजकल बाजार में नकली नोट की भरमार है अब समय आ गया है हमें जागने का नकली नोट को बाजार में चलने से रोके नोट ५ सो और १ हजार का नोट लेने से पहले नोट की जांच अच्छी तरह से करे अगर हम नहीं जागेंगे तो जाली नोट कारोबारों के हौंसले बुलंद हो जायेंगे ।

अब मै कुछ लिंक शेयर करना चाहता हूँ जिसे पढ़कर नकली नोट की पहचान कर सकेंगे एक ही नजर में

Security Features on Indian Banknotes

Detect Fake Rs 500 and Rs 1000 Indian currency notes

To Identify Rs. 1000 Fake Note

कुछ और बातें मै शेयर करना चाहता कि किस परिस्थिति में नोट की चेकिंग जरूर करे ।

१. जब कोई ५ सौ या १ हजार के नोट का छुटा पैसा मांगे तो समझ ले कि दाल में कुछ जरूर काला है।

२. जब कोई दुकानदार से कोई सस्ती चीज ख़रीदे और ५ सौ रूपये का नोट दे ।

३ कोई ५ सौ रूपये देकर आप को बातों में अटका रहा हो ।

४ नोट थोडा हल्का लग रहा हो तो जरूर चेक करें ।

५ लिंक में लिखे इंस्ट्रक्शन को अच्छी तरह से दिमाग में बैठा ले या याद कर लें इसे अपनी आदत बना ले नोट लेने में जल्दीबाजी न करें ।

Wednesday, April 24, 2013

Teepu

टीपू

मेरे घर में एक नौकर था उसका नाम टीपू था । टीपू बहुत दिनों से मेरे घर में काम करता था । सब लोगों का विस्वास उसने जीत लिया था । कोई उसे नौकर नहीं समझता था । एक दिन की बात है वो मेरी साइकिल लेकर दुकान गया बोल कुछ सामान लेना है अभी वापस आ जाऊँगा । हम लोगों ने बोला ठीक है थोड़ी देर बाद वो वापस आ गया फिर शाम हो गई । वो साइकिल रखकर घर चला गया । फिर सुबह हुई तो हम सब ने देखा की साइकिल गायब हो गई थी ।

जब टीपू काम पे वापस आया तो उससे पूछा तो वह बोला की शाम को तो यही रख के गया था । थोड़े दिन बीत गए साइकिल नहीं मिली । इसी बीच टीपू का गाँव की एक लड़की के साथ प्यार हो गया लेकिन लड़की के घर वाले इस प्यार के खिलाफ थे तो टीपू लड़की को भगा ले गया कहीं किसी शहर में चला गया ।

लकड़ी के घर वालों ने पुलिस में सिकायत कर दी । टीपू के घर की कुर्की को गई और कुर्की के दौरान मेरी साइकिल उसके घर में मिली हम लोगों को पता चल गया की साइकिल की चोरी टीपू ने की थी  ।

इधर पुलिस टीपू के पिताजी को परेशान करने लगी उन्हें कभी कभी पुलिस की मार भी खानी पड़ रही थी । टीपू के पिता का नाम बाबू था जो की अब इस दुनिया में नहीं है । बाबु जब बहुत परशान हो गया तो टीपू का पता लगाने लगे वो हरियाणा में किसी दोस्त के यहाँ था जब उसने सुना की बाबु को बहुत मार पड़ रही है तो गाँव वापस आ गया और मेरे पिताजी के पैरों में गिरकर माफ़ी मांगने लगा । बोला अब कभी चोरी नहीं करूँगा । मेरे पिताजी ने जो उसे क्षमा कर दिया पर माँ ने नहीं किया ।

फिर मेरे भाई ने एक अच्छा वकील कर दिया और कुछ दिनों में टीपू पुलिस केस जीत गया परन्तु इनदिनों टीपू को २ महीने की जेल की हवा खानी पड़ी । उस दिन से लेकर आज तक टीपू मेरे घर पर ही काम करता है और उसके बाद से चोरी कभी नहीं की ।

ऐसा इसलिए संभव हुआ क्यों की उसने दिल से पश्चाताप कर लिया था और जो दिल से सुधर जाता है उसकी सजा खुद बा खुद माफ़ी के काबिल हो जाती है ।

Tuesday, April 23, 2013

Very Big question about rape crimes in India

rape crime

baaton hi baaton mein

बातों ही बातों में

में यह बताना चाहता हूँ कि अगर कोई व्यक्ति चाहे वो छोटा ही क्यों न हो कुछ बताना चाहता हूँ कुछ स्कीम शेयर करना चाहता हो तो आप उसे एक बार सुने जरूर और अगर अम्ल करने जैसा लगे तो करें जरूर क्यों की आप बातों ही बातों में पैसा कमा सकतें है । में लोगों को जब बताता था की आप इन्टरनेट से पैसा कमा सकते है तो कोई कहता था बकवास है सब टाइम बर्बादी है ।

कोई सुनता था कोई नहीं । में जिस कंपनी में काम करता था वहां दो बॉस थे मैंने दोनों से कहा की आप इन्टरनेट से पैसा कमा सकते है एक बॉस बोल फालतू में बकवास मत किया करो । लेकिन दूसरा बॉस प्रैक्टिकल आदमी था उसने सुना तो मैंने उसे गूगल के बारे में बताया उसे कांसेप्ट पसंद आया और एक ब्लॉग भी खोल दिया ।

देखते देखते उसने दो सौ डॉलर कमा लिए । जब भी कुछ नया बताता हूँ वो अप्लाई कर लेता है । आप कंपनी के लिए तो जिंदगी भर काम करते रहते है लेकिन ब्लॉग्गिंग एक ऐसा जरिया है जो आप के लिए एक कंपनी बना देता है ।

अगर आप भी ब्लॉग के जरिये कमाना चाहते है तो गूगल सर्च के जरिये पाए सारी जानकारी और सुरु करें अपनी पर्सनल इनकम आज ही ।

Paap ka bhagidar kaun hai

पाप का भागीदार

मेरा एक दोस्त है उसका नाम है संजय वो साकाहारी और मांसाहारी दोनों प्रकार का भोजन करता है परन्तु मांसाहारी में चिकेन के आलावा कुछ नहीं खाता था एक दिन उसे दुसरे दोस्त ने उसे खाने पे बुलाया और बकरे का मांस पेश किया । पहले तो संजय ने सोचा की नहीं खाऊंगा पर बार बार कहने पर खा लिया ।

दुसरे दिन संजय मुझे मिला तो बताया मैंने कल मटन खा लिया अब खा लिया तो खा लिया उसने खिलाया तो वो ही पाप का भागीदार हुआ न ।

तो मैंने कहा नहीं मै तुम्हे तीन लाइन में बताता हूँ किसने क्या कमाया ।

कसाई ने बकरा काटा तो पैसा कमाया

दोस्त ने तुम्हे खिलाया तो दोस्ती कमाई

तुमने खाया तो पाप कमाया ।

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